दिवाली के 5 दिनों का महत्त्व क्या हैं ?

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हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी भारत में दिपावली / दिवाली का त्यौहार धूम-धाम से मनाया जाएगा। दिवाली का मतलब केवल घर की सफाई करना, दिए जलाना, मिठाई खाना या पटाखे फोड़ना नहीं हैं। दिवाली मनाने के पीछे कई कहानी और अर्थ छिपा हैं और दिवाली मनाने के सही मतलब आजके युवा पीढ़ी और बच्चों को समझाना जरुरी हो गया हैं। 

हर समाज धर्म में त्योहारों के मनाने के तरीके विधि विधान अलग हो सकते हैं लेकिन हर त्योहार के पीछे आस्था, परंपरा, विश्वास के साथ आनंद की अनुभूति होती है। सभी त्योहारों से कोई न कोई पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है। इन कथाओं का संबंध आस्था से होता है। 

यही कथाएं आस्था के जरिए संस्कार और संस्कृति का चलन पीढ़ी-दर-पीढ़ी करती रहती है। कथाएं नई पीढ़ी को पथभ्रष्ट होने से बचाती है और त्योहार सबको समाज और देश की जड़ों से जुड़े रखने का माध्यम बनते हैं। 

दिवाली त्यौहार का महत्त्व और इसके के 5 दिन क्या किया जाता है इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं :

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दिवाली के 5 दिनों का महत्त्व क्या हैं ? 


Diwali essay in Hindi


कार्तिक मास की अमावस्या के दिन दीपावली मनाई जाती है। दिवाली 1 दिन का ना होकर पर्वों का एक श्रृंखला है। इसके साथ पांच पर्व जोड़े हुए हैं और सभी के साथ दंतकथाएं भी जुड़ी है। दिवाली का त्यौहार दिवाली से 2 दिन पूर्व आरंभ होकर 2 दिन बाद समाप्त हो जाता है। 
  1. धनतेरस : प्रथम दिन का शुभारंभ कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के दिन से यानी धनतेरस से होता है। यह दिन आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की आराधना का है। इस दिन नए बर्तन आभूषण इत्यादि खरीदने का रिवाज है। इस दिन की के दीप जलाकर देवी लक्ष्मी का आवाहन करते हैं। 
  2. नरक चौदस : दूसरा दिन चतुर्दशी को नरक चौदस के रूप में मनाते हैं। इसे छोटी दीवाली भी कहते हैं। इस दिन एक पुराने दीपक में सरसों का तेल और पांच अन्न के दाने डालकर इसे घर में जला कर रखते हैं जिसे यम दीपक कहा जाता है। एक कथा के अनुसार श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर राक्षस का वध कर उसके कारागार से 16000 कन्याओं को मुक्त कराया था। 
  3. दिवाली : तीसरे दिन अमावस्या को न केवल पूरे देश बल्कि विश्व भर में मुख्य दीवाली पर्व के रूप में भारतीय हर्षोल्लास से मनाते हैं। इस दिन लक्ष्मी, सरस्वती और गणेश की एक साथ पूजा की जाती है। 
  4. अन्नकूट : चौथे दिन दीवाली की श्रंखला का उत्सव अन्नकूट का होता है। लोग इस दिन व्यंजन बनाकर गोवर्धन की पूजा करते हैं। श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत अपनी उंगली पर उठाकर इंद्र के कोप से डूबते ब्रिजवासियों को बचाया था। इसी दिन लोग अपने गाय बैलों को सजाते हैं तथा गोबर का पर्वत बनाकर पूजा करते हैं। 
  5. भाईदूज : पांचवा दिन शुक्ल द्वितीया को भाई दूज का त्यौहार राखी से कम नहीं होता है। मान्यता है कि इस दिन भाई और बहन यमुना में स्नान करें तो यमराज भी निकट नहीं आते हैं। कई स्थानों पर बहना के घर भाई भेंट लेकर जाते हैं और बहन उसे खाना खिला कर भेजती है। 
आशा है आपको यह दिपावली त्यौहार से जुडी जानकारी आप सभी को उपयोगी लगी होगी और इसे आप शेयर अवश्य करेंगे !
TipsinHindi परिवार से आप सभी को दिवाली की हार्दिक शुभकामनाये !

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