कान खींचने / Ear reflexology के स्वास्थ्य लाभ !


किसी गलती करने पर या मानने पर 'कान खींचना' भले ही सजा देने का एक रूप हैं लेकिन यदि इसे एक तरीके से किये जाये तो यह एक उपचार पद्धति है। Ear Reflexology या Auriculotherapy यह दबाव से उपचार की एक ऐसी तकनीक हैं, जिसमें उँगलियों तथा अंगूठे की मदद से कान के 91 से अधिक बिंदुओं पर विशेष दबाव डालकर सेहत सुधार किया जाता हैं।

बिना किसी विपरीत परिणाम के यह उपचार पद्धति बिलकुल प्राकृतिक और सुविधाजनक हैं क्योंकि इसमें दबाव से ऊर्जा को नियंत्रित किया जाता हैं और वह ऊर्जा रोग प्रतिरोधक क्षमता को सक्रीय करके रोगों का उपचार करती हैं। चीनी चिकित्सकों की प्रयासों से इस तकनीक को विश्व स्वास्थ्य संघटन ने 1990 में पूरक उपचार पद्धति के रूप में मान्यता दी हैं।

Ear reflexology का महत्व और इसे कैसे किया जाता है इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं :

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कान खींचना अब बुरा नहीं !

Reflexology / दबाव उपचार की शुरुआत कैसे हुई ?

दबाव उपचार की करीब 4000 वर्ष पुरानी एक सुरक्षा पद्धति हैं जो Acupressure और Acupuncture के साथ विकसित हुई। ऐसा माना जाता है की चिन में ताओवादी चिकित्सा और जनजातीय प्रथाओं से उपजी यह पूरक चिकित्सा तकनीक जापान और भारत के रास्ते पूरी दुनिया में फैली और आज एक स्थापित चिकित्सा पद्धति बन गयी हैं।

हमारे शरीर के उत्तम स्वास्थ्य के लिए प्रकृति ने सैकड़ों Reflex area या दबाव क्षेत्र बनाए हैं। इस पद्धति में दबाव का बेहद महत्त्व हैं। यह दबाव क्षेत्र हथेली, तलवे, मुंह, पीठं, गले, कान तथा कुछ अन्य भागों में होते हैं जिन पर दबाव डालकर शरीर को स्वस्थ किया जा सकता हैं।

Reflexology / दबाव का क्या सिद्धांत हैं ?

हमारी शारीरिक क्रियाए किसी एक अंग की गतिविधि का परिणाम नहीं होती बल्कि विभिन्न अंग के तालमेल से इन क्रियाओं का संचालन होता हैं। यदि शरीर का एक अंग भी रोगी हो जाता हैं तो पुरे शरीर का तालमेल बिगड़ जाता हैं। ऐसे में यदि अंग विशेष के रोग को ठीक कर दिया जाये तो पूरा शरीर तंदरुस्त हो जाता हैं।

Reflexology / दबाव उपचार न केवल रोगों का उपचार करती है बल्कि शरीर की सफाई भी करती हैं। हमारे शरीर में कई कारणों से विषैले तत्व जमा हो जाते है जो अनेक रोग को जन्म देते हैं। विशिष्ट अंग पर दबाव डालने से रासायनिक क्रिया शुरू हो जाती हैं जिसमे क्रिस्टल के रूप में जमे हुए टॉक्सिन्स घुलकर मल-मूत्र तथा पसीने के जरिये शरीर से बाहर निकल जाते हैं। इससे शारीरिक शुद्धिकरण होता हैं।

क्या हैं Ear Reflexology ?

Ear Reflexology एक बेहद प्रभावशाली दबाव क्रिया हैं। इंसान के कान गर्भ में पल रहे एक शिशु की स्तिथि जैसे होते हैं। कान की संरचना ऐसी है जैसे एक गर्भस्थ शिशु का सिर निचे की ओर, माध्यम भाग मुडा हुआ और पैर ऊपर की ओर। कान में मौजूद Reflex बिंदु शरीर के विभिन्न अंगों के प्रतिनिधि माने जाते हैं जिन पर 30 सेकंड से लेकर कई मिनटों तक आवश्यकतानुसार दबाव दिया जाता हैं। दबाव उंगली, अंगूठे, किसी धातु या लकड़ी का उपकरण, छोटे बिज या पतली लिथियम पट्टी से दिया जाता हैं। अब ऐसे आटोमेटिक प्रेशर जनरेटर भी उपलब्ध हैं जो इस काम को बेहद आसान और असरदार बना सकने में सक्षम हैं।

Ear Reflexology के लाभ क्या हैं ?

Ear Reflexology के कई लाभ है जिनमे से कुछ इस प्रकार हैं :
  1. दर्द से निजात 
  2. ब्लड प्रेशर नियंत्रण 
  3. संक्रमण को दूर करना 
  4. रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ाना 
  5. हार्मोनल संतुलन 
  6. तनाव मुक्ति 
  7. याददाश्त बढ़ाना 

Ear Reflexology कैसे किया जाता हैं ?

Ear Reflexology कैसे किया जाता है इसकी जानकारी निचे दी गयी हैं :
  • सबसे पहले आपको कहा पीड़ा हो रही है और इसके लिए कौन सा बिंदु दबाना है यह Ear Reflexology का दबाव बिंदु चित्र में देखे। 
  • अब एक शांत जगह पर निचे जमीं पर या खुर्ची पर शांति से बैठ जाये। 
  • अगर आपके बाल घने लम्बे है तो उन्हें कान के क्षेत्र से पीछे करे। जरुरत हो तो क्लिप का प्रयोग करे। 
  • शुरुआत में कान के लोब (कर्ण पाली) को पकड़ कर दबाव दे और निचे खींचे। दर्द हो इतना ज्यादा दबाव या निचे न खिचे। 
  • अब कान के बाहरी और उपरी किनार से लेकर निचे तक अंगूठे और तर्जनी (Index Finger) की मदद से दबाव देते रहे और 5 सेकंड दबाव देने के बाद छोड़कर निचे की ओर आते रहे। 
  • इसी प्रकार दुसरे कान पर भी करे। 
  • कान के बाहरी हिस्से का होने के बाद चित्र देख अन्दर के हिस्सों पर दबाव देना चाहिए। इसी तरह दुसरे कान पर भी करे। 
  • अंदरूनी हिस्से पर दबाव देने के लिए विशेष उपकरण का प्रयोग किया जा सकता है पर यह विशेषज्ञ के देखरेख में करे। 
  • Ear Reflexology का प्रयोग विशेषज्ञ से सिखने के बाद ही करे। 
  • Ear Reflexology कई मामलों में उपयोगी है पर संक्रमण या पीड़ा अधिक होने पर डॉक्टर से चिकित्सा कराना जरुरी है इसलिए अपने लक्षणों की अनदेखी बिलकुल न करे।  
पहले स्कूल में किसी गलती पर या तो कान पकड़ कर खड़ा रहना पड़ता था या फिर काम पकड़ कर उठक-बैठक लगाना पड़ता था। तब है यह केवल शिक्षा या सबक पढ़ाने का एक हिस्सा लगता था पर अब अध्ययन से पता चला है की इससे बौधिक क्षमता में जबरदस्त इजाफा होता हैं। कई मंदबुद्धि या Mentally Retarded बच्चों में अब इसका उपयोग चिकित्सा के तौर पर किया जा रहा है और इसका गजब परिणाम भी सामने आ रहा हैं। वेदों से चली आ रही यह भारतीय तत्वज्ञान का पहले लोग मजाक बनाते थे पर अब जब अध्ययन से सभी बातों का
अर्थ सामने आ रहा है तो पता चलता है की हमारे पूर्वज सचमे किते ज्ञानी और महान थे। 

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