पुदीना का घरेलु आयुर्वेेदिक उपयोग !


आयुर्वेद के अनुसार पुदीना / Peppermint स्वादिष्ट, रुचिकर, पचने में हल्का, तीक्ष्ण, तीखा, कड़वा, पाचनकर्ता, उलटी मिटनेवाला, ह्रदय की उत्तेजित करनेवाला, वायुनाशक, विकृत कफ को बाहर निकालने वाला, गर्भाशय संकोचक, चित्त को प्रसन्न करनेवाला, जख्मों को भरनेवाला, कृमि, ज्वर, विष, अरुचि, मंदाग्नि, दस्त, खांसी, श्वास, निम्न रक्तचाप, त्वचा रोग में लाभकारी और कृमि का नाश करनेवाला होता है।

पुदीने में रोगप्रतिकार शक्ति उतपन्न करने की अद्भुत क्षमता होती हैं। पुदीने के बीज से निकलनेवाला तेल स्थानिक पीड़ानाशक और जंतुनाशक होता है। यह दंतपिडा और दन्तकृमिनाशक होता है। इसके तेल की सुगंध से मच्छर भाग जाते है।


  • मंदाग्नि - पुदीने में Vitamin A अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसमें पाचन शक्ति को मजबूत करनेवाले तत्व अधिक मात्रा में पाये जाते हैं। इसके सेवन से भूक खुलकर लगती हैं। पुदीना, अदरक, तुलसी, और कालीमिर्च का काढ़ा पिने से भूक अच्छे से लगती है और पाचन ठीक से होता हैं।
  • त्वचाविकार -  दाद-खाज पर पुदीने का रस लगाने से लाभ होता है। हरे पुदीने की चटनी बनाकर सोते समय चेहरे पर उसका लेप करने से मुंहासे फुंसियां समाप्त हो जाती है।
  • हिचकी - हिचकी बंद न हो रही हो तो पुदीने के पत्ते या नींबू चूसने से लाभ मिलता हैं। 
  • पैर दर्द - सुखा पुदीना व मिश्री समान मात्रा में मिलाएं एवं दो चम्मच फंकी लेकर पानी पिए इससे पैर दर्द ठीक होता है।
  • मलेरिया - पुदीने एवं तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर सुबह शाम लेने से अथवा पुदीना एवं अदरक का एक-एक चम्मच रस सुबह-शाम लेने से लाभ होता है।
  • कृमि - पुदीने के दो चम्मच रस में एक चुटकी काला नमक डालकर पीने से पेट के कृमि नष्ट होते हैं।
  • गैस - प्रताकाल एक गिलास पानी में 20 से 25 ग्राम पुदीने का रस व 20 से 25 ग्राम शहद मिलाकर पीने से गैस की बीमारी में विशेष लाभ होता है।
  • सर्दी और जुखाम - पुदीने के रस की दो से तीन बूंद नाक में डालने एवं पुदीने तथा अदरक के एक-एक चम्मच रस में शहद मिलाकर दिन में दो बार पीने से पुरानी सर्दी जुकाम में लाभ होता है।
  • अनार्तव और अल्पार्तव - मासिक ना आने पर या कम आने पर अथवा वायु एवं कफ दोष के कारण बंद हो जाने पर पुदीने के काढ़े में गुड एवं चुटकी भर हींग डाल कर पीने से लाभ होता है। इससे कमर की पीड़ा में भी आराम होता है। 
  • आंत का दर्द - अपचन, अरुचि, मंदाग्नि, वायु आदि रोगों में पुदीने के रस में शहद डालकर ले अथवा पुदीने का अर्क लेना चाहिए।
  • उलटी और दस्त - पुदीने के रस में निम्बू का रस प्याज अथवा अदरक का रस एवं शहद मिलाकर पिने से लाभ होता है। 
ऐसे तो पुदीना एक प्राकृतिक और आयुर्वेदिक औषधि होने के कारण इसका कोई विशेष दुष्परिणाम / side effect नहीं हैं पर फिर भी किसी रोग के लिए इसका उपयोग करने से पूर्व अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। 
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