भगवान की श्रेष्ठ रचना !

On,



कुछ दिनों पहले मुझे अपने मोबाइल पर एक बेहद सुन्दर मैसेज मिला था। इस मैसेज में इतना बड़ा सन्देश है की मैं इसे आपके साथ भी इसे share करना चाहता हूँ। हम सभी जानते है की स्त्रियां भगवान की सबसे सुन्दर और महत्वपूर्ण रचना हैं। स्त्री चाहे वह माँ, पत्नी, बेटी या बहन किसी भी रूप में क्यों न हो हमेशा अपना छोड़ औरों के मंगलकामना के लिए प्रयासरत रहती हैं।

ऐसे ही भगवान की श्रेष्ट रचना स्त्रियों को समर्पित यह सन्देश निचे share कर रहा हूँ। अगर यह मैसेज आपको भी पसंद आता है तो कृपया इसे share अवश्य करे। 


स्त्री क्या है ?

जब भगवान स्त्री की रचना कर रहे थे तब उन्हें काफी समय लग गया । आज छठा दिन था और स्त्री की रचना अभी भी अधुरी थी।

इसिलए देवदुत ने पूछा भगवन्, 'आप इसमें इतना समय क्यों ले रहे हो...?'

भगवान ने जवाब दिया क्या तूने इसके सारे गुनधर्म (specifications) देखे हैं, जो इसकी रचना के लिए जरूरी है।
यह हर प्रकार की परिस्थितियों को संभाल सकती है। 
यह एकसाथ अपने सभी बच्चों को संभाल सकती है एवं खुश रख सकती है । यह अपने प्यार से घुटनों की खरोंच से लेकर टूटे हुये दिल के घाव भी भर सकती है ।
यह सब सिर्फ अपने दो हाथों से कर सकती है ! इस में सबसे बड़ा "गुणधर्म" यह है कि बीमार होने पर भी अपना ख्याल खुद रख सकती है एवं 18 घंटे काम भी कर सकती है।

देवदूत चकित रह गया और आश्चर्य से पूछा- "भगवान ! क्या यह सब दो हाथों से कर पाना संभव है ?"

भगवान ने कहा यह स्टैंडर्ड रचना है, (यह गुणधर्म सभी में है )

देवदूत ने नजदीक जाकर स्त्री को हाथ लगाया और कहा, 'भगवान यह तो बहुत नाजुक (soft) है !'

भगवान ने कहा, " हाँ ! यह बहुत ही सोफ्ट है, मगर इसे बहुत strong बनाया है। इसमें हर परिस्थितियों का संभाल ने की ताकत है। "

देवदूत ने पूछा, " क्या यह सोच भी सकती है ?"

भगवान ने कहा, " यह सोच भी सकती है और मजबूत हो कर मुकाबला भी कर सकती है।"

देवदूत ने नजदीक जाकर स्त्री के गालों को हाथ लगाया और बोला, "भगवान ये तो गीले हैं। लगता है इसमें से लिकेज हो रहा है।"

भगवान बोले, " यह लीकेज नहीं है। यह इसके आँसू हैं।"

देवदूत ने पूछा, "आँसू किस लिए ?"

भगवान बोले, "यह भी इसकी ताकत हैं । आँसू इसको फरीयाद करने एवं प्यार जताने एवं अपना अकेलापन दुर करने का तरीका है। "

देवदूत ने कहा, "भगवान आपकी रचना अदभुत है । आपने सबकुछ सोच कर बनाया हैआप महान है !"

भगवान बोले, " यह स्त्री रूपी रचना अदभुत है । यही हर पुरुष की ताकत है जो उसे प्रोत्साहित करती है। वह सभी को खुश देखकर खुश रहतीँ है। हर परिस्थिति में हंसती रहती है । उसे जो चाहिए वह लड़ कर भी ले सकती है। उसके प्यार में कोइ शर्त नहीं है उसका दिल तुट जाता है जब अपने ही उसे धोखा दे देते है । मगर हर परिस्थितियों से समझोता करना भी जानती है। "

देवदुत ने कहा, "भगवान आपकी रचना संपूर्ण है।"

भगवान बोले, "नहीं !अभी इसमें एक त्रुटि है। यह अपनी "महत्वत्ता" भूल जाती है !!" 

देवदूत ने कहा, " सचमे स्त्री की महानता का को शब्दों में बयां करना मुमकिन नहीं हैं। प्रभु, आपकी यह रचना सबसे श्रेष्ठ हैं !"


logo

No comments:

Post a Comment