हकलाहट का घरेलु आयुर्वेदिक ईलाज


हकलाने और अटककर बोलने की बीमारी अधिकतर बच्चों में पाई जाती हैं। हकलाने को अंग्रेजी में Stammering भी कहा जाता हैं। हकलाने वाले बच्चों के माता-पिता को बच्चों की यह बीमारी असीमित परेशानी में डाल देती हैं और बच्चों को निराशा से भर देती हैं। कई युवा भी इस परेशानी से पीड़ित होने के कारण अपना आत्मसम्मान खो देते हैं। 

हकलाने की समस्या से राहत पाने के लिए आप निचे दिए हुए असरदार आयुर्वेदिक घरेलु उपाय कर सकते हैं : 


haklana-stammering-ayurvedic-remediy-hindi
हकलाने के लक्षण और संकेत
  • किसी शब्द, बाक्य, पक्ति को शुरू करने में समस्या। 
  • कुछ शब्दों को बोलने से पहले हिचकिचाहट महसूस करना।  
  • किसी शब्द, आवाज या शब्दांश को दोहराना
  • वाक्य तेज गति से निकलना 
  • बोलते समय तेज गति से आँखे भींचना 
  • होटों में कपकपाहट 
  • पैरों को जमीन पर थपथपाना 
  • जबड़े को हिलाना इत्यादि
हकलाहट के आयुर्वेदिक उपचार
  • गुनगुने ब्राम्ही तेल से सिर पर 30 से 40 मिनिट तक मालिश करे उसके बाद गुनगुने पानी से नहा ले। इससे स्मरण शक्ति में सुधार होता हैं और अटककर या हकलाकर बोलने का दोष कम होता हैं। 
  • एक चमच्च सारस्वत चूर्ण और आधा चमच्च ब्राम्ही किरुथम शहद में मिला दे। इस मिश्रण को चावल के गोलों में मिलाकर मुंह में रखकर अच्छी तरह से चबाने से हकलाहट में लाभ मिलता हैं। बेहतर होंगा अगर आप इसका सेवन नाश्ते के रूप में चटनी जैसा करे। नाश्ते के बाद 30ml सारस्वतारिष्ट लेने से हकलाहट में लाभ मिलता हैं। 
  • गाय का घी हकलाहट को दूर करने के लिए एक उत्तम उपचार माना जाता हैं। 
  • नियमित रूप से एक आंवले का सेवन करने से हकलाहट कम होती हैं। 
  • सुबह सवेरे एक चमच्च सूखे आंवले का पाउडर और एक चमच्च देसी घी का सेवन करने से हकलाहट में लाभ मिलता हैं। 
  • 12 बादाम पूरी रात पानी में डुबोकर रखे और सुबह उनके छिलके उतार कर पिंस ले और उन्हें 30 ग्राम मख्हन के साथ सेवन करने से हकलाहट में लाभ मिलता हैं। 
  • हकलाहट दूर करने के लिए 10 बादाम और 10 कलि मिर्च मिश्री के साथ पिस कर दस दिन तक सुबह शाम सेवन करने से हकलाहट में लाभ मिलता हैं। 
  • सूर्य की तरफ पीठ कर एक आइना पकड़कर और मुंह खोलकर ऐसी स्तिथि में बैठे ताकि सूर्य की रौशनी आईने में प्रतिबिंबित होकर आपके खुले मुंह में प्रवेश करे। गहरी सांस ले और धीरे-धीरे अपना मुंह खोले और आईने की अपनी जीभ पर प्रतिबिंबित करे। जीभ आपके मुंह के निचले भाग की तरफ होनी चाहिए, अगर आपने सही तरह से निर्देशों का पालन किया हैं। अपनी जीभ को ढीला छोड़ दे उसे कभी भी कड़ा न करे क्योंकि ऐसा करने से हकलाहट बनी रहती हैं। आपकी जीभ को सुचारू रूप से कार्यशील करने के लिए यह एक उत्तम उपाय मन गया हैं। 
  • योग और प्राणायाम द्वारा हकलाहट में लाभ मिल सकता हैं। हकलाहट से पीड़ित व्यक्ति ने रोजाना सूर्यनमस्कार, सिंहासन और सर्वांगासन योग करना चाहिए। प्राणायाम में अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और कपालभाति का अभ्यास करना चाहिए। 
अगर आपके बच्चे की हकलाने की आदत 6 महीने से ज्यादा और 5 वर्ष की उम्र से ज्यादा तक जारी रहता हैं तो तुरंत किसी विशेषज्ञ (Speech Therapist) की सलाह लेनी चाहिए। 

Image courtesy of Stuart Miles at FreeDigitalPhotos.net
अगर यह जानकारी आपको उपयोगी लगती है तो कृपया इसे share अवश्य करे !

0 comments:

Post a Comment

Share अवश्य करे !

जरूर पढ़े !