आधुनिक युग और Real Togetherness


आज का युग Technology और Internet का युग हैं। आज हर कोई Digital India की बात करता हैं। हर कोई चाहता है की उसके पास नयी से नयी technology हो जिसका वह ज्यादा से ज्यादा उपयोग कर सके। आज दुनिया में कही पर भी कोई छोटी-बड़ी घटना की जानकारी हम घर बैठे चंद सेकंड में पा सकते हैं। जब चाहे तब कोसों दूर बैठे अपने परिवार या यार-दोस्तों से face to face video calling कर सकते हैं। 

जहाँ यह सोच थी की, technology ने दुनिया को छोटे से दायरे में बाँध दिया है जिससे की लोगों के बीच की दूरिया कम होकर लोग एक दूसरे से ज्यादा करीब आएंगे असल में सूरत कुछ और ही नजर आती हैं। आज हमारे Facebook या Whatsapp पर हजारों दोस्त है पर असलियत में हम अपने पडोसी का नाम भी नहीं जानते हैं। आजकल असली दोस्ती कम और artificial दोस्ती ज्यादा दिखाई देती हैं।
Real togetherness in Hindi
आज के digital world का हालात क्या हैं इसका अंदाजा हम निचे दी हुई खूबसूरत पंक्तियों से लगा सकते हैं !

जाने क्यों अब शर्म से, चेहरे गुलाब नहीं होते !
जाने क्यों अब मस्त मौला मिजाज नहीं होते !!
पहले बता दिया करते थे दिल की बातें !
जाने क्यों, अब चहरे खुली किताब नही होतें !!
सुना हैं बिन कहे समझ लेते थे !
गले लगते ही दोस्त हालात सकझ लेते थे !!
तब न Facebook ना smart mobile था,
ना Whatsapp ना Tweeter account था !
एक चिट्टी से ही दिलों के जज्बात समझ लेते थे !!
सोचता हूँ हम कहाँ से कहा आ गए !
Practical सोचते सोचते भावनाओं को खा गए !!
अब भाई-भाई से समस्या का समाधान कहाँ पूछता हैं !
अब बेटा बाप से उलझनों का निदान कहा पूछता हैं !!
बेटी नहीं पूछती माँ से गृहस्थी के सलीके !
अब कौन गुरु के चरणों में बैठ कर ज्ञान की परिभाषा सीखे !!
जिंदगी में हम अब Practical हो गए हैं !
मशीन बन गए है सब, इंसान जाने कहा खो गए हैं !! 

बदलाव जिंदगी का नियम हैं, पर इस बदलाव के साथ हमें अपने पुराने संस्कार और अच्छी बातों को भी साथ में संजोना चाहिए। हम चाहे कितने भी आधुनिक क्यों न हो जाये हमें मशीनो से ज्यादा अपने परिवार और दोस्तों को समय देना चाहिए। आज कल समाज में फैली Negativity और दूरियों को दूर करने के लिए हम digital technology और nature दोनों का संयुक्त रूप से उपयोग कर सकते हैं। 

आज कल हर society एक छोटे से गाँव की तरह ही है जिसमे अलग-अलग धर्म के और अलग-अलग काम करनेवाले रहते हैं। बहुत कम society ऐसी होती है जिसमे ज्यादातर लोग एक दूसरे से अच्छी जान पहचान रखते हैं। हम अपने society में किसी छुट्टी के दिन ऐसा कोई सार्वजनिक कार्य का आयोजन कर सकते है जिससे की ज्यादा से ज्यादा लोग एक दूसरे से जुड़े और लोगों में एकता बढे। 

हम कोई भी कार्यक्रम रख सकते है जिसमे सभी की सहभागी हो जैसे की वृक्षारोपण, रक्तदान, Laughter club, स्वच्छता कार्यक्रम या मन की बात जैसा कार्यक्रम जिसमे कोई भी व्यक्ति अपने परेशानी सभी के साथ share करे और सभी मिलकर उस परेशानी का हल ढूंढे। ऐसे छोटे-छोटे कार्यक्रमों से ही दूरिया मिटती है और real togetherness बढ़ता हैं। ऐसे कार्यक्रम को न तो किसी technology की जरुरत है न किसी app की, जरुरत है तो सिर्फ सच्चे साथ / Real togetherness की !

आप निचे दी हुई इस video से भी सिख ले सकते है जिसमे कैसे एक बुजुर्ग की छोटी सी पहल से लोगों को real togetherness की पहचान होती हैं। आप चाहे तो Kisaan के इस वेबसाइट http://www.kissanpur.com/ पर जाकर अपने Society या मोहल्ले में मिलकर टमाटर को उगा सकते है और अपनी कहानी सभी के साथ share कर सकते हैं।
Image courtesy of smarnad at FreeDigitalPhotos.net

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