एक लघु प्रेरणात्मक कहानी - आत्मविश्वास का महत्व

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हर किसी के जिंदगी में एक ऐसा समय आता हैं जब हमें कुछ ऐसा फैसला लेना होता है, जिसका हमारे आनेवाली जिंदगी पर बहुत बड़ा असर होता हैं। ऐसा ही एक समय मेरे जिंदगी में 10वी कक्षा के बाद आया था जब मुझे Science, Commerce या Arts मे से किस श्रेणी में दाखिला लेना चाहिए यह सवाल परेशान कर रहा था। उस कठिन समय में जब मेरा आत्मविश्वास डगमगा रहा था, मैंने एक छोटी सी प्रेरनादायी कहानी दूरदर्शन पर देखी थी जिससे मुझे अपनी जिंदगी का अहम फैसला लेना का हौसला मिला। उसी कहानी को आज मैं आपके साथ साझा कर रहा हूँ जिससे आपको भी प्रेरणा मिल सके और दुविधा के परिस्तिथि में आपको आत्मविश्वास मिले।

एक लघु प्रेरणात्मक कहानी - आत्मविश्वास का महत्व
एक बार एक बालक ने अपने माँ को पेंसिल से कुछ लिखते हुए देखा। बच्चा हैरान रह गया ! सोचने लगा की जब मैं छोटा होकर भी पेन से लिखने की जिद करता हूँ तो माँ बड़ी होकर बच्चो की तरह पेंसिल से क्यों लिख रही हैं ? वह माँ से बोला, "माँ आप पेन्सिल से क्यों लिख रही हैं ?" माँ अपने बेटे से बोली, "बेटा, मुझे पेंसिल से लिखना पसंद हैं। इसमें कई गुण हैं। " बालक अपनी माँ के इस बात को समझ नहीं पाया। एक छोटी सी पेंसिल, भला उसमे लिखने के अलावा क्या गुण हो सकते हैं ? माँ को अपने बेटे की परेशानी समझ में आ गयी। माँ ने अपने बेटे से कहा, " यह पेंसिल भले ही बहोत छोटी दिखती हो पर लिखने के अलावा यह पेंसिल हमें अपने जीवन से जुड़े कई अहम सिख देती हैं। इसके प्रमुख गुण अगर तुम अपनालो तो इस संसार में शांतिपूर्वक और सफलता पूर्वक रह सकोंगे।

1) पहला गुण - आत्मविश्वास

पेन्सिल में अधिक महत्व बाहरी लकड़ी का नहीं है, अन्दर के Graphite का हैं। इसलिए हमें भी अपने जिंदगी बाहरी रूप से ज्यादा महत्व अपने अन्दर के विचारों को देना चाहिए। हमारा बाहरी स्वरुप भले कैसा भी हो, चाहे कुदरत ने हमें इतना आकर्षक न बनाया हो, ज्यादा लम्बाई न दी हो। हमें इन बाहरी बातो से परेशान होने की जगह अपने विचारो को सुन्दर एवं सकारात्मक रखना चाहिए। हमें अपने आप पर विशवास रखना चाहिए।

2) दूसरा गुण - निशान छोड़े

पेन्सिल हमेशा अपने निशान छोड़ जाती हैं। हमें भी अपने जीवन में ऐसे अच्छे काम करने चाहिए जिससे की औरो को सहायता मिल सके और इन्ही अच्छे कामो से हमारी पहचान हो सके।

3) तीसरा गुण - गलती सुधारे 

अगर पेंसिल से कुछ गलती हो जाती है तो हम उसे रबर से मिटाकर ठीक कर सकते हैं। जीवन में हर किसी से कोई न कोई गलती हो ही जाती हैं। गलती करना कोई बुरी बात नहीं हैं, बुरी बात है अपनी गलती को न मानना और उसे ठीक करने से कतराना। हमें जीवन में हमेशा अपनी गलती को नम्रता से स्वीकारना चाहिए और उसे ठीक करने का प्रयास भी करना चाहिए।

4) चौथा गुण - गुणों को बढ़ाये

जब हम पेंसिल से लिखते है तो समय-समय पर अच्छी लिखावट के लिए, हमें रुक कर उसकी धार को शार्पनर से पैना करना पड़ता हैं। ठीक इसी तरह, जीवन में भी सफलता पाने के लिए समय-समय पर हमें अपने ज्ञान और कौशल्य को पैना करना चाहिए। चाहे कितना भी बड़ा डॉक्टर क्यों न हो, उसे भी समय के हिसाब से नयी दवा या नयी चिकित्सा उपकरणों के बारे में एक विद्यार्थी की तरह सीखना पड़ता हैं। जीवन में हमें हमेशा एक अच्छे विद्यार्थी की तरह नयी बातो को आत्मसात करना चाहिए और अपने अनुभवों से सीखना चाहिए।

जब से मैंने अपने जीवन में पेंसिल की इस छोटी सी कहानी के बड़े सन्देश को अपना लिया हैं, मेरी जिंदगी ने एक नयी राह पकड़ ली हैं। मैंने खुद पर विश्वास करना शुरू किया, पढाई के अपने गलत तरीके में सुधार किया और अपने लिखावट और एकाग्रता जैसे गुणों को बढ़ाना शुरू किया। मुझे Science और Maths जैसे विषयो से डर लगता था। मैंने जोखिम उठाया और 10वी कक्षा के बाद Science में दाखिला लिया। हर किसी को उम्मीद थी की मै कुछ ज्यादा नहीं कर पाऊंगा। परिवार वालो को लगता था की मैंने Science लेकर बड़ी गलती कर दी हैं। मैं जनता था की, असफल व्यक्ति की सबसे बड़ी गलती यही होती हैं की वह किसी गलती (काम )को करने से डरता हैं । मैंने Science की चुनोती को खुद को सिद्ध करने का अवसर माना। आज जब मैं अच्छे अंक से पास होकर एक डॉक्टर बन गया हूँ तो सब मेरे उस फैसला की तारीफ करते हैं।

एक अत्यंत सफल व्यक्ति ने अपनी मेज के सामने यह वाक्य लिखकर लटका रखा था - " सबसे कठिन कार्य सबसे पहले करना चाहिए ! "  यह आदत लाभदायक है क्योंकि इससे आवश्यक कार्य टाले नहीं जा सकते। मेरे लिए नए शहर में सबसे कठिन काम था एक सुन्दर घर खरीदना। मेरे इस सपने को पूरा करने के लिए भी बहोत मेहनत करनी पड़ी। मुझे जगह जगह घूमना पड़ता। बहोत घुमने के बाद अंत में मुझे अपने मन लायक घर मिला। आज के समय में मनपसंद जगह पर मनपसंद घर लेने जैसे कठिन कार्य को भी Housing.com जैसे websites ने आसान बना दिया हैं।

मेरी आप सभी से यहाँ यही सलाह है की पेंसिल के इस छोटी कहानी के सिख को अपने जीवन में अपनाये। खुद पर विश्वास रखे। अपने डर को गले लगाना सीखे, वह तुरंत छूमंतर हो जायेंगा। अपने कमीयों को ठीक करे और अपने गुणों को बढ़ाये। आपकी जिंदगी सफलता के नए सफ़र पर चलनी शुरू हो जाएँगी !

Image courtesy : arztsamui at FreeDigitalPhotos.net


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