एक पिता का अपने बेटे को प्रेरणादायी पत्र


हर किसी के जीवन में एक दौर ऐसा आता है जब वो हताश और निराश हो जाता हैं। किसी भी व्यक्ति का सबसे बड़ा नुक्सान तब होता हैं, जब वह इंसान अपने आप में विश्वास खो देता हैं। यह निराशा किसे भी आ सकती हैं। चाहे वो करोडपति हो या गरीब हो। इंसान की इच्छाओ की कोई सीमा नहीं हैं और यही कारण हैं कि कोई कितना भी सफल क्यों न हो, अधिक पाने की लालसा उसे परेशान और निराश कर सकती हैं।

एक ऐसा दौर मेरे भी जीवन में आया था जब अधिक पाने की हसरत के कारण में निराश हो गया था। मेरी खुशनसीबी थी की इस मुश्किल दौर में मेरे अपनों ने मेरा साथ दिया और मुझे प्रोत्साहित किया था। इस घटना को में आपके साथ इसलिए साझा कर रहा हु ताकि अगर आपके जीवन में अगर कोई ऐसा मुश्किल दौर आए तो आप भी इससे सफलतापूर्वक बहार निकल सके।

A Motivational Letter from Father to his Son In Hindi.


यह बात हैं तब की हैं जब मैं 12 STD में था और मुझे पूरा यकीन था की मैं उस साल की मेरिट लिस्ट में जरुर आऊंगा। मेरे सारे पेपर्स बहोत अच्छे गए थे और मुझे अच्छे अंक मिलने की पूरा यकीन था। जब रिजल्ट आया तब मुझे 90% अंक प्राप्त हुए पर उस वर्ष मेरिट लिस्ट 91% पर बंद होने के कारण मेरा नाम उस लिस्ट में न आने से मैं काफी दुखी और हताश हो गया था। मेरे पिताजी उस समय राजस्थान में थे और वह जानते थे की मेरी हालत क्या होंगी। उस समय उन्होंने मुझे एक पत्र लिखा था जो आज भी मैंने संभालकर रखा हैं।

मेरे पिताजी ने उसमे लिखा था की, आज जब तुम्हारे अन्य दोस्त 65% और 70% मार्क्स मिलने पर भी ख़ुशी मना रहे हैं तो फिर मुझे इतने अच्छे मार्क्स मिलने पर उदास नहीं होना चाहिए। जीवन में बड़ा लक्ष्य जरुर रखना चाहिए पर अगर लक्ष्य प्राप्ति न हो तो उदास नहीं होना चाहिए। हमें अपने विफलताओ से प्रेरणा लेकर आगे और अच्छी कोशिश करनी चाहिए। जिंदगी में सामने आनेवाली मुश्किलों से परेशान होकर हार तो कोई भी मान लेता हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जी अपने भीतर की हिम्मत को हमेशा इस सोच के साथ सहज कर रखते हैं, की हार मान लेने से तो निश्चित ही हार हो जानी हैं तो क्यों न अगले बार और प्रयास करके हारा जाए। हार गए तो गिला नहीं और जीत गए तो कहने क्या ? हमारा जीवन छोटी बड़ी हार और जित से बना होता हैं। किसी पल हमें हमारा डर हरा देता हैं तो अगले ही पल हमें हमारी हिम्मत अपने सोच से भी ज्यादा बड़ी जीत दिला देती हैं। सब मूलतः हमारे सोच पर निर्भर करता हैं। हमें अपने आप पर शतप्रतिशत भरोसा रख अपनी पूरी मेहनत और लगन से हर काम करना चाहिए। पिताजी ने अंत में एक सुन्दर वाक्य लिखा था,

" Never let Success get to your Head ! Never let Failure get to your Heart !! "

मेरे पिताजी ने मुझे हमेशा हर अच्छे काम के लिए प्रोत्साहन दिया है और मुझे हर वक्त आत्मनिर्भर होने की सलाह दी है। आर्थिक रूप आत्मनिर्भर बनने के लिए जरुरी है की हम भविष्य की योजना ठीक से बनाकर रखे। मैंने कही एक सुन्दर वाक्य पढ़ा था, " A Goal without a Plan is just a Wish ! " आज के दौर में परिवार के लोग अपने बच्चो को हर काम में मदद करते हैं, यहाँ तक की उनके गृह अभ्यास भी खुद कर देते हैं। हमें अपने बच्चो को हमेशा आत्मनिर्भर बनने की सिख देनी चाहिए। अगर उनसे चुक हो जाए तो उसे ठीक करनी चाहिए पर कोशिश करे की वह ज्यादा से ज्यादा आत्मनिर्भर बने और उनका आत्मविश्वास बढे।

हम रहे न रहे, हमारा परिवार आत्मनिर्भर रहने के लिए हमें Term plan, Mutual Funds और Mediclaim इत्यादि आर्थिक निवेश कर योग्य योजना करनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की मुश्किल घडी में परिवार को परेशानी का सामना करना न पढ़े।

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